इन्टर-नेशनल डिपार्टमेंटः हमदुल्लाह अमादी हैदरी: एक ऐसे समय में जब पश्चिम के प्रोपेगंडे सेंटर और साथ ही कुछ नेशनल अख़बार यह कहते नहीं थक रहे कि जल्द ही ईरान पर हमला होने वाला है या यह कि यू. एस. ए. और उसके दोस्त मुल्कों की तरफ़ से इस मुल्क पर होने वाले आर्थिक हमलों (पाबंदियों) के सामने इस्लामिक रिपब्लिक कमज़ोर पड़ता जा रहा है, कुछ पश्चिमी एनालिस्ट 2012 की अपनी आख़िरी आर्टिकिल में यह कहते नज़र आ रहे हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक से छेड़ छाड़ का अंजाम क्या हो सकता है यह अमेरिकन समाज सोच भी नहीं सकता और यह कि ईरानियों का समस्याओं से निपटने का तरीक़ा आश्चर्यजनक है।रजा न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार इंग्लिश दैनिक इंडिपेंडेन्ट के मशहूर एनालिस्ट राबर्ट फ़ीस्क नें 31 दिसम्बर 2012 के अपने आर्टिकल, “क्या अगला इन्क़ेलाब सऊदी में आएगा?, में लिखा है: ईरानी जनता पश्चिमियों को जानती है इतना पश्चिमी ईरान को नहीं जानते हैं। इसका कारण यह है कि इस समय बहुत से ईरानी राजनीतिज्ञ अमेरिका के पढ़े हैं। ईरानी अगर चाहें तो आश्चर्यजनक तौर पर हर समस्या पर क़ाबू पा सकते हैं।”आगे चलकर लिखते हैं, “जार्ज बुश नें अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया और ईरान को तालेबान से छुटकारा दिला दिया। उसके बाद बुश और इंग्लैण्ड के पूर्व प्रधान मंत्री टोनी ब्लेयर नें मिलकर ईराक़ पर हमला किया और इस्लामिक रिपब्लिक के ख़तरनाक दुश्मन सद्दाम को ठिकाने लगा दिया। ईरान नें एक गोली भी नहीं चलाई और ईराक़ और अफ़्ग़ानिस्तान दोनों जंगें जीत लीं। रही बात अमरीका और इस्राईल के ईरान पर हमले की तो इसमें कोई शक नहीं कि ईरान उसका जवाब देगा। इस्राईल में ईरान से पूरी तरह से दो-दो हाथ होने की हिम्मत नहीं है इस लिये हार जाएगा और अमेरिका को ईराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में हारने के बाद अब कोई तीसरी जंग शुरू करने का कोई शौक़ नहीं है।”उनका कहना था कि 2013 में भी वाशिंग्टन और तिल अबीब पाबंदियों को ईरान से मुक़ाबले के हथियार के तौर पर एस्तेमाल करते रहेंगे।आख़िर में उन्होंनें पाठकों से कुछ सवाल पूछ कर उनका ध्यान पश्चिम की ईरान से दुश्मनी की तरफ़ मोड़ा है। लिखते हैं, “सवाल यह है कि यू. एस. ए. ईरान को क्यों धमकियां देता है? पाकिस्तान के पास ऐटम बम है और वहाँ की हुकूमत कमज़ोर होने के साथ साथ कट्टरपंथी भी है लेकिन उसके बावुजूद उसे ऐसी कोई धमकी नहीं दी जाती, क्यों? दलील यह दी जाती है कि अमेरिका ग़ैर ज़िम्मेदार लोगों यानी ईरान के हाथ में ऐटमी ताक़त नहीं देखना चाहता, सीरिया की सरकार भी ग़ैर ज़िम्मेदार है इसके कारण उसके पास भी कैमिकल गैस नहीं होनी चाहिये, ग़ज़्ज़ा में हमास ग़ैर ज़िम्मेदार हैं इसलिये अमेरिका को डर है कि कहीं डेमोक्रेसी इस गुट के हाथ में न चली जाए।”दूसरी तरफ़ अमरीका के जार्ज टाउन यूनिवर्सिटी के फॉरेन पॉलिसी डिपार्टमेंट में मध्यपूर्व विषयों के एक्सपर्ट के तौर पर काम कर रहे यूरो जर्नलिस्ट क्रिस्टेन चोंग जो जंग के समय ईराक़ में थे, अपनी वेबसाइट पॉलिसी माइक्रो फ़ोन पर इस हवाले से लिखते हैं, “नया साल ऐसे माहौल में आ रहा है जब ओबामा के लिये ईरान और उसके ऐटमी प्रोग्राम से बड़ा कोई पेचीदा और धमाकाख़ेज़ विषय नहीं है.. अमेरिका और इस्राईल की ईरान से जंग केवल एक बड़ी जंग ही नहीं होगी बल्कि यू. एस. ए. को मध्य पूर्व जैसे तनाव वाले इलाक़े में एक और बड़ी जंग में ढ़केल देगी और ऐसी हालत का इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान पर हमला और उसके बाद होने वाले ख़ून ख़राबे से थक चुका अमेरिकन समाज सोच भी नहीं सकता।”चोंग का मानना है कि 2013 में 5+1 के साथ ईरान की वार्ता भी चलेगी जायोनी राज्य और अमेरिका की ईरान के ख़िलाफ़ सीक्रेट और साईबर वार भी चलती रहेगी। लेकिन इसमें भी ईरान चुप्पी नहीं साधेगा बल्कि अपना डिफ़ेंस करेगा। इस लिये देखना होगा कि पॉलीसियां ईरान को कंट्रोल करने में कितनी कामयाब साबित होंगी।..........166
11 जनवरी 2013 - 20:30
समाचार कोड: 381039
इन्टर-नेशनल डिपार्टमेंटः हमदुल्लाह अमादी हैदरी: एक ऐसे समय में जब पश्चिम के प्रोपेगंडे सेंटर और साथ ही कुछ नेशनल अख़बार यह कहते नहीं थक रहे कि जल्द ही ईरान पर हमला होने वाला है...........